कुछ  पूँछना चाहता हूँ आज आप सब से क्या कोई  इंसान सही या गलत ही हो सकता है ? क्या सही होने के लिए सही होना ज़रूरी है ? क्या ज़रूरी है की हम सबकी नज़र में सही हो? हम कभी-कभी अपनी नज़र में ही सही नहीं हो  सकते? मैं कहना दरअसल ये चाहता हूँ की क्या दो ही रंग संभव  है  एक  काला  दूजा सफ़ेद ? बीच  के   बाकी  रंगों  का  कोई  वजूद  नहीं  ? स्लेटी  रंग  का  वजूद  यों नकारा तो  नहीं  जा  सकता ?
                  सही और गलत एक स्पेक्ट्रम की  तरह क्यूँ नहीं  हो सकता ? ये विचार नहीं  प्रश्न है . आप कृपया उत्तर अवश्य दें?

बड़े दिनोँ से चाहत थी कि कुछ लिखूँ,तो आज से लिखना शुरू कर रहा हूँ। लेकिन अब समस्या यह कि क्या लिखूँ, किस विषय पर लिखूँ? राजनीति पर, मीडिया पर, फिल्मोँ पर या कि ख़ुदी पर?.......................................................................................................................................................................................................................................चलो ख़ुद को किसी सीमा बंधन में न बाँधते हुए यह निर्णय करता हूँ कि कभी न कभी कुछ न कुछ तो ज़रुर लिखूँगा। ्‌नमस्ते्

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