कुछ  पूँछना चाहता हूँ आज आप सब से क्या कोई  इंसान सही या गलत ही हो सकता है ? क्या सही होने के लिए सही होना ज़रूरी है ? क्या ज़रूरी है की हम सबकी नज़र में सही हो? हम कभी-कभी अपनी नज़र में ही सही नहीं हो  सकते? मैं कहना दरअसल ये चाहता हूँ की क्या दो ही रंग संभव  है  एक  काला  दूजा सफ़ेद ? बीच  के   बाकी  रंगों  का  कोई  वजूद  नहीं  ? स्लेटी  रंग  का  वजूद  यों नकारा तो  नहीं  जा  सकता ?
                  सही और गलत एक स्पेक्ट्रम की  तरह क्यूँ नहीं  हो सकता ? ये विचार नहीं  प्रश्न है . आप कृपया उत्तर अवश्य दें?

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